अब क्या मिसाल दू में तुम्हारे शबाब की.
इन्सान बन गयी हे किरण महताब की .
यु तो हिंदी फिल्मो में अनगिनत नगमे हे .जिन्हें सुनकर एक अजीब सा सुकून मिलता हे .
एक नगमा हे फिल्म आरती का जिसे सुन कर आप कह उठेगे हां यही वो गीत हे जो तन मन ताजा कर देता हे.
और ऐसा लगता हे की कोई खुशबु सी चारो और बिखर गयी हो .
बड़ी खुबसूरत और दिलकश आवाज़ हे. बहुत अच्छा साज़ हे.और गजब के अलफ़ाज़ हे
एक एक शब्द जैसे मोतियों में पिरोया गया हे .
1962 में आई फिल्म आरती का ये गीत लिखा हे मजरूह सुल्तानपुरी ने और इसे संगीत से संवारा हे रोशन साहब ने, रोशन साहब आज के सुपर सितारे ऋतिक के दादा हे. और इस खुबसूरत गीत को बड़ी खूबसूरती से अपनी दिलकश और हर दिल अज़ीज़ आवाज़ में गाया हे मोहमद रफ़ी साहब ने.
अब क्या मिसाल दू में तुम्हारे शबाब की
अब क्या मिसाल दू में तुम्हारे शबाब की

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