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Monday, 18 April 2016

विश्व प्रसीद्ध जयपुर का हवामहल, world famous jaipur hawamahal

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पूरी दुनिया में जयपुर अपनी विरासत के लिए जाना जाता हे | वैसे तो यहाँ आमेर का महल, जंतर मंतर, सिटी पैलेस, नहारगड़ ,जयगड़, जैसी विश्व प्रसीद्ध और ऐतिहासिक इमारते हे | लेकिन हवामहल की बात ही अलग हे |

ये विश्व की पहली ऐसी ईमारत हे जो बिना नींव के बनी हुई हे | इस  पांच मंजिला ईमारत में लगभग 1000, खिड़किया हे | इसका निर्माण महाराजा सवाई प्रताप सिंह ने सन 1799 में कराया था |

हवामहल स्थापत्य कला का एक शानदार नमूना हे | ये राजपूत और मुग़ल शैली का खुबसूरत मिश्रण हे | इसमें फूल पत्तियों का शानदार काम, गुम्बद और विशाल खम्बे राजपूत कला का अच्छा नमूना हे | मुग़ल शैली की नक्काशी और खुबसूरत मेहराब मुग़ल शैली का शानदार नमूना हे | इसकी प्रत्येक छोटी खिड़की पर बलुआ पत्थर की बेहद आकर्षक और खूबसूरत नक्काशीदार जालियां, कंगूरे और गुम्बद बने हुए हैं। जो इसे दुनिया भर में बेमिसाल बनाते हैं।

हवामहल की खूबियों में इसकी खिडकियों का बड़ा कमाल  हे | जैसा की नाम से ही जाहिर हो रहा की हवामहल में हवा का खास ध्यान रखा गया हे | लगभग 1000, छोटी  बड़ी खिड़किया हे | जिसमे से ठंडी ठंडी हवाए आती रहती हे और इसीलिए गर्मी में भी यहाँ ढंडक रहती हे |

और हा इन खिडकियों में रानिया  और शाही महिलाये बैठ कर शहर में से निकालने वाली झाकिया और जुलुस आदि का  आनंद लेती थी | इसके अन्दर बैठने वाले बाहर  का पूरा नजारा देख सकते हे | लेकिन बाहर से कोई इनको नहीं देख सकता |

आप अगर जयपुर आये तो हवामहल जरूर देखना | आपको बहुत पसंद आएगा | लेकिन गर्मी में ना आये यदि आये तो सर्दी बहुत अच्छा मोसम हे | वाकई जयपुर बड़ा खुबसूरत शहर हे और यहाँ के लोग भी |

शुक्रिया
आपका वसीम राजा
मो. 9928451750

Wednesday, 13 April 2016

अच्छे अखलाक़ और इंसानियत good conduct & humanness



सबसे अच्छा इन्सान वो हे जिसके अखलाक अच्छे हो | अखलाक उसके अच्छे होंगे जिसके पास सब्र हो


किसी ने  कहा हे | इन्सान होना हमारा इन्तेखाब नहीं कुदरत की अता हे, लेकिन अपने अन्दर इंसानियत बनाये रखना अपना इंतेखाब हे |

मेरे हिसाब से आज हम लोगो के पास सब्र का माद्दा बहुत कमजोर हो गया हे |

इसलिए आज हमारे बर्दाश्त करने की ताकत भी बहुत कमजोर हो गयी हे | अगर कोई हमसे ऊँची आवाज में बात करे या कोई हमारी बुराई करे तो हमसे सब्र नहीं होता | हम उसकी बुरी बात का उससे बुरे अंदाज में जवाब देते हे | काश, ऐ काश की हमारे पास सब्र हो तो हम उसकी बुरी बात का जवाब उम्दा अखलाक से देते उसकी बुरी बात के बदले उससे अच्छे अंदाज में बात करते |

हम अपने अच्छे अखलाक से दुश्मन को भी दोस्त बना सकते हे | कोई इन्सान कितना भी बुरा हो अगर आप उससे मोहब्बत से पेश आते हे तो यकीनन वो इन्सान आपका हमदर्द, आपका दोस्त  बन जाएगा |

जरूरत हे तो सिर्फ इसी बात की हम अपने आप को बदले | अपनी कमियों को देंखे | और खुश अखलाक वाले बने| बुराइयों के जवाब  अच्छाई से दे | आज सोशल साइटे बुराइयों  को बढाने और हिन्दू मुस्लिम के बीच नफरतो का जहर खोलने का एक प्लेटफार्म बन गई हे | फेसबुक और व्हाट्सअप पर देखे तो हर कोई एक दुसरे को निचा दिखाने में कोई कसर  नहीं छोड़ रहा | हमें आज जिस सबक को पड़ने की सबसे ज्यादा जरूरत हे वो इंसानियत और मोहब्बत हे | हम यह अहद करे की अपने अखलाक से दुश्मनों को भी दोस्त बनायेगे |