सबसे अच्छा इन्सान वो हे
जिसके अखलाक अच्छे हो | अखलाक उसके अच्छे होंगे जिसके पास सब्र हो
अखलाक और सब्र जिसके पास हे
| वो इन्सान ही सबसे कामयाब और कीमती इन्सान हे |
किसी ने कहा हे | इन्सान होना हमारा इन्तेखाब नहीं कुदरत
की अता हे, लेकिन अपने अन्दर इंसानियत बनाये रखना अपना इंतेखाब हे |
मेरे हिसाब से आज हम लोगो
के पास सब्र का माद्दा बहुत कमजोर हो गया हे |
इसलिए आज हमारे बर्दाश्त
करने की ताकत भी बहुत कमजोर हो गयी हे | अगर कोई हमसे ऊँची आवाज में बात करे या
कोई हमारी बुराई करे तो हमसे सब्र नहीं होता | हम उसकी बुरी बात का उससे बुरे
अंदाज में जवाब देते हे | काश, ऐ काश की हमारे पास सब्र हो तो हम उसकी बुरी बात का
जवाब उम्दा अखलाक से देते उसकी बुरी बात के बदले उससे अच्छे अंदाज में बात करते |
हम अपने अच्छे अखलाक से
दुश्मन को भी दोस्त बना सकते हे | कोई इन्सान कितना भी बुरा हो अगर आप उससे
मोहब्बत से पेश आते हे तो यकीनन वो इन्सान आपका हमदर्द, आपका दोस्त बन जाएगा |
जरूरत हे तो सिर्फ इसी बात
की हम अपने आप को बदले | अपनी कमियों को देंखे | और खुश अखलाक वाले बने| बुराइयों
के जवाब अच्छाई से दे | आज सोशल साइटे
बुराइयों को बढाने और हिन्दू मुस्लिम के
बीच नफरतो का जहर खोलने का एक प्लेटफार्म बन गई हे | फेसबुक और व्हाट्सअप पर देखे
तो हर कोई एक दुसरे को निचा दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा | हमें आज जिस सबक
को पड़ने की सबसे ज्यादा जरूरत हे वो इंसानियत और मोहब्बत हे | हम यह अहद करे की अपने
अखलाक से दुश्मनों को भी दोस्त बनायेगे
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