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Wednesday, 13 April 2016

अच्छे अखलाक़ और इंसानियत good conduct & humanness



सबसे अच्छा इन्सान वो हे जिसके अखलाक अच्छे हो | अखलाक उसके अच्छे होंगे जिसके पास सब्र हो


किसी ने  कहा हे | इन्सान होना हमारा इन्तेखाब नहीं कुदरत की अता हे, लेकिन अपने अन्दर इंसानियत बनाये रखना अपना इंतेखाब हे |

मेरे हिसाब से आज हम लोगो के पास सब्र का माद्दा बहुत कमजोर हो गया हे |

इसलिए आज हमारे बर्दाश्त करने की ताकत भी बहुत कमजोर हो गयी हे | अगर कोई हमसे ऊँची आवाज में बात करे या कोई हमारी बुराई करे तो हमसे सब्र नहीं होता | हम उसकी बुरी बात का उससे बुरे अंदाज में जवाब देते हे | काश, ऐ काश की हमारे पास सब्र हो तो हम उसकी बुरी बात का जवाब उम्दा अखलाक से देते उसकी बुरी बात के बदले उससे अच्छे अंदाज में बात करते |

हम अपने अच्छे अखलाक से दुश्मन को भी दोस्त बना सकते हे | कोई इन्सान कितना भी बुरा हो अगर आप उससे मोहब्बत से पेश आते हे तो यकीनन वो इन्सान आपका हमदर्द, आपका दोस्त  बन जाएगा |

जरूरत हे तो सिर्फ इसी बात की हम अपने आप को बदले | अपनी कमियों को देंखे | और खुश अखलाक वाले बने| बुराइयों के जवाब  अच्छाई से दे | आज सोशल साइटे बुराइयों  को बढाने और हिन्दू मुस्लिम के बीच नफरतो का जहर खोलने का एक प्लेटफार्म बन गई हे | फेसबुक और व्हाट्सअप पर देखे तो हर कोई एक दुसरे को निचा दिखाने में कोई कसर  नहीं छोड़ रहा | हमें आज जिस सबक को पड़ने की सबसे ज्यादा जरूरत हे वो इंसानियत और मोहब्बत हे | हम यह अहद करे की अपने अखलाक से दुश्मनों को भी दोस्त बनायेगे |

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